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राबड़ी देवी के 10 सर्कुलर रोड बंगले पर बढ़ी हलचल, खाली कराने की प्रक्रिया तेज, CCTV हटने और सामान शिफ्ट होने से सियासी चर्चा तेज

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पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी देवी के सरकारी आवास को खाली कराने की प्रक्रिया तेज हो गई है। अंतिम नोटिस के बाद बंगले से CCTV हटाए गए और सामान शिफ्ट किए जाने की खबर से बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।

पटना/आलम की खबर:बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के पटना स्थित सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड को लेकर चल रही प्रशासनिक प्रक्रिया अब तेज होती दिखाई दे रही है। लंबे समय से बिहार की राजनीति का केंद्र रहे इस बंगले को खाली कराने के मामले में शुक्रवार को उस समय नई हलचल देखने को मिली, जब आवास के बाहर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों को हटाया गया और घर के सामान को ट्रकों के जरिए दूसरी जगह भेजे जाने की तस्वीरें सामने आईं। इन गतिविधियों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि सरकारी आवास खाली करने की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है।

10 सर्कुलर रोड स्थित यह सरकारी बंगला सिर्फ एक आवास नहीं बल्कि बिहार की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए राबड़ी देवी ने इसी आवास से राज्य की सत्ता संभाली थी। इसके बाद भी कई वर्षों तक यह स्थान राष्ट्रीय जनता दल की राजनीतिक गतिविधियों और बैठकों का प्रमुख केंद्र बना रहा। लालू प्रसाद यादव परिवार से जुड़े इस बंगले का राजनीतिक महत्व काफी अधिक रहा है, इसलिए इससे जुड़ी हर गतिविधि पर राजनीतिक नजरें बनी रहती हैं।

बिहार भवन निर्माण विभाग की ओर से राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने के लिए अंतिम नोटिस जारी किया गया था। विभाग ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया था कि निर्धारित समय सीमा के अंदर 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करना होगा। विभाग की ओर से यह भी बताया गया था कि अगर तय अवधि में आवास खाली नहीं किया जाता है तो बिहार सरकारी परिसर अधिनियम के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

सरकार की ओर से राबड़ी देवी के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था भी किए जाने की जानकारी दी गई थी। विभाग के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री के लिए 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी संपत्तियों का उपयोग तय नियमों के अनुसार होता है और किसी भी व्यक्ति को नियमों का पालन करना जरूरी है।

शुक्रवार को 10 सर्कुलर रोड के बाहर हुई गतिविधियों ने इस पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया। आवास के बाहर लगे सुरक्षा कैमरों को हटाया गया। इसके साथ ही घर के अंदर रखे सामान को ट्रकों में लादकर बाहर ले जाते हुए देखा गया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितना सामान हटाया गया है और उसे कहां ले जाया जा रहा है, लेकिन घटनाक्रम से यह संकेत जरूर मिल रहा है कि आवास खाली करने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

इससे पहले भी सरकारी आवास खाली करने को लेकर राबड़ी देवी को नोटिस दिया जा चुका है। मई महीने में जारी निर्देश के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया था। उस समय राबड़ी देवी ने सरकार के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि वह अपनी इच्छा से बंगला खाली नहीं करेंगी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर सरकार उन्हें हटाना चाहती है तो प्रशासनिक कार्रवाई कर सकती है।

राबड़ी देवी के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी देखने को मिला था। विपक्ष ने इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बताया था, जबकि सरकार की ओर से इसे नियमों के तहत की जा रही सामान्य प्रक्रिया बताया गया। सरकारी पक्ष का कहना है कि यह फैसला किसी व्यक्ति विशेष को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि सरकारी संपत्तियों के नियमों के अनुसार लिया जा रहा है।

राजनीतिक रूप से देखा जाए तो 10 सर्कुलर रोड का महत्व राष्ट्रीय जनता दल के लिए काफी ज्यादा रहा है। लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के राजनीतिक दौर में यह आवास कई बड़े फैसलों और बैठकों का गवाह रहा है। पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए भी यह स्थान लंबे समय से एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यही वजह है कि बंगला खाली कराने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा बनी हुई है।

अब सबकी नजर 29 जून की समय सीमा पर टिकी हुई है। भवन निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि अगर तय समय तक आवास खाली नहीं किया जाता है तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अगर परिवार की ओर से समय सीमा के अंदर आवास खाली कर दिया जाता है तो मामला प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत समाप्त हो जाएगा।

फिलहाल 10 सर्कुलर रोड पर हुई गतिविधियों ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। आने वाले कुछ दिनों में यह साफ हो जाएगा कि राबड़ी देवी और उनका परिवार इस मामले में क्या कदम उठाता है और सरकार की ओर से आगे की प्रक्रिया किस दिशा में जाती है।

सरकारी आवासों का आवंटन और खाली कराना एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, लेकिन जब मामला किसी बड़े राजनीतिक चेहरे से जुड़ा होता है तो इसकी चर्चा सामान्य मामलों से कहीं ज्यादा होती है। राबड़ी देवी का 10 सर्कुलर रोड आवास भी ऐसा ही स्थान है, जो वर्षों तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहा है।

सरकार का तर्क नियमों के पालन का है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक नजरिए से देख रहा है। ऐसे मामलों में सबसे जरूरी बात यही होती है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार और पारदर्शी तरीके से पूरी हो। अब 29 जून की समय सीमा के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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